Wednesday, November 26, 2008

डरो नहीं, मैं केवल दुःख नहीं हूँ | दुःख आज खुश है

डरो नहीं, मैं केवल दुःख नहीं हूँ | दुःख आज खुश है

अगर दुःख आपसे बात करना चाहता, जो एक परिकल्पना है, तो वह आप से क्या कहता?
मैं न देव हूँ, न देवदूत हूँ, फिर भी मेरे सम्यक दर्शन से इंसान सच्ची खुशी की शरण में पहुँच जाता है |
फिर मैं कौन हूँ?
मैं ईश्वर की पुकार हूँ |
मैं जर्गीती का जन्मदाता हूँ |
मैं विश्व में विकास को ऊंचाइयों
तक ले जाने के लिए निमित्त हूँ |
मैं विकास का मंत्र हूँ |
मैं सुख का जुड़वां भाई कहलाया जाता हूँ |
मैं संसार की सर्कस का जोकर हूँ |

मैं पृथ्वी पर आपसे पहले भेजा गया हूँ ताकि मैं आपका स्वागत कर सकूँ |
दुःख आज खुश है क्योंकि वह एक पुस्तक के आइने में आपके सामने बेनकाब होने जा रहा है | इस पुस्तक द्वारा आप मेरे रहस्य जानने वाले हैं | आप यह समझने वाले हैं कि ‘ मैं संदेह नहीं बल्कि मनन संदेश हूँ ‘ |

इस पुस्तक के रचयिता तेजगुरु सरश्री को मैं तहेदिल से धन्यवाद देता हूँ क्योंकि उन्होंने मेरा संपूर्ण दर्शन आपके सामने उजागर किया है | इसे बार-बार पढ़ दुःख-सुख के खेल में निपुण हो जायें ताकि आप खेल-खेल में संपूर्ण खुल, खिल जायें | यही मेरी दवा, दुआ और दावा है |

सदा आप कि सेवा में
आप के विकास का इच्छुक

दुःख ….

5 comments:

रचना गौड़ ’भारती’ said...

आपने बहुत अच्छा लिखा है ।
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
www.zindagilive08.blogspot.com
आर्ट के लि‌ए देखें
www.chitrasansar.blogspot.com

संगीता पुरी said...

आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है। आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे । हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

Anonymous said...

ब्लॉग जगत में स्वागत है

अब, आज 27 नवम्बर के दिन
आईये हम सब मिलकर विलाप करें

तरूश्री शर्मा said...

मैं संसार की सर्कस का जोकर हूँ |

बढ़िया परिभाषा है दुख की। एक सकारात्मक दृष्टिकोण रखने के लिए बधाई।

गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर said...

bahut khub, narayan narayan